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पं. दिव्य नारायण शास्त्री जी 

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सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई?srasti ki utppi kaise hui?

सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई?  सकल जग हरि कौ रूप निहार।हरि बिनु बिस्व कतहुँ कोउ नाहीं, मिथ्या भ्संसार।।अलख-निरंजन, सब जग ब्यापक, सब जग कौ आधार।नहिं आधार, नाहिं कोउ हरि महँ, केवल हरि-बिस्तार।।  अखिल ब्रह्माण्ड नायक कि सृष्टि कि सुन्दरता इतनी है कि कोई और करीगर एसी करिगरी नही कर सकता  एक प्रकार से कहा जाये तो मनुष्यो और जीव-जन्तूओ के लिए पांच सितारा बाला होटल है ये संसार परंतू मनुष्य इसे अपने तरीके से बदल रहा है  भगवान कहते हैं -मेने मानुष जनम तुमको हीरा दिया,तू व्यर्थ गवाए तो मे क्या करू|
वेद-वेदान्तो मे सब बता ही दिया,
तेरी समझ में ना आये तो मे क्या करू ||
अन्न फल दूध धी भी तुमको दिया,
मेवा मिष्टान भी मेने पैदा दिया ||
हत्यारा हो जीभ के स्वाद में |
तू अगर मान्स खाए तो मे क्या करू ||
यह अनंत ब्रह्माण्ड अलख-निरंजन परब्रह्म परमात्मा का खेल है। जैसे बालक मिट्टी के घरोंदे बनाता है, कुछ समय उसमें रहने का अभिनय करता है और अंत मे उसे ध्वस्त कर चल देता है। उसी प्रकार परब्रह्म भी इस अनन्त सृष्टि की रचना करता है, उसका पालन करता है और अंत में उसका संहारकर अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है। यही उसकी क्रीडा है,…

सत्य क्या है? satya kya hai?

सत्य क्या है? ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्यम्


ब्रह्म ही सत्य है बकी सारा जगत मिथ्या है, उस संसार में परम पिता परमात्मा ही सत्य है वाकी सारा जगत मिथ्या है एक मात्र शाश्वत सत्य मृत्यू ही है इस संसार में जोभी कुछ है वह सब कुछ झूठ है और यह संसार परमात्मा का रंग मंच है और हम उनके खिलौने है जिस प्रकार बच्चे थिलौनो से खेलते है
 और फिर जब मन भर जाता है तो उन्हे तोड देते हैं उसी प्रकार ब्रह्म भी खेलते है और मन भर जाता है तो संसार का प्रलय कर देते हैं
भगवान का यह संसार कृणा स्थल है जहा प्रभू खेलते है और मनुष्य जब कोई गलती करता है और पाप करता है तो भगवान हसते है कि मेने तुम्हे संसार में तुम्हें धर्म कर्म करने के लिए भेजा था और तुम ये सब पाप कर रहे हो हमे पाप का मार्ग छोड के पुण्य का मार्ग अपनाना चाहिए परमात्मा ने हमे 84लाख योनियो मे सबसे श्रेष्ठ मनुष्य का जन्म दिया
और हम इस सरीर को व्यर्थ गवा रहे हैं हमे जब और अच्छी चीज फ्री मे मिलती है तो हमे उसका उपयोग बहुत अच्छे से करना चाहिए और हमे तो बहुत ही कीमती शरीर मिला है
 जो देवताओ को भी दुर्लभ है
बडें भाग्य मानुष तनपावा
 सुरदुर्लभ सब ग्रंथन गाबा
वह शरीर मिला…

ब्रह्म क्या है? कोन है? brahm kya hai?

ब्रह्म क्या है? कोन है?
ब्रह्म एक सून्य के समान है जो अपने आप मे पूर्ण है जिस प्रकार किसी अंक के पीछे सून्य लग जाने से उस अंक कि किमत बढ जाजी है उसी प्रकार ब्रह्म है | ब्रम्ह कि जरूरत सब को है परंतू ब्रह्म को किसी जरूरत नही है ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार सून्य कि जरूरत अंको को है
 mahavishnu  सून्य को किसी कि जरूरत नही है | परब्रह्म एक सून्य के समान है ब्रह्म हर जगह है इशा वाशं जगत सर्वं इश्वर का वाश सारे जगत मे है हर प्राणी मे इश्वर है वही इश्वर जो जगत मे हमे रहने कि भोजन कि व्यवस्था देते हैं
srashthi ki utpatti सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई? परमात्मा का उपकार हमे पुन्य करके चुकान चाहिए लेकिन हम पुण्य करने कि जगह पाप कि पाप कर रहे हैं  माया माया सब भजे माधव भजे ना कोई|
 जो एक बार माधव भजे माया चेली होये || तो पैसा पैसा तो सब बोलते हैं पर भगबान का नाम कोई नहीं लेता है लेकिन एक बार सच्चे मन से भगबान का नाम लेलिया ना तो माया भी पीछे पीछे घूमेगी |  प्रेम क्या है?|Prem kya had? हमे दिन भर में दस मिनट तो भगवान का नाम लेना चाहिए इस काम से भगबान तो प्रशन्न होते ही है और मन भी शांत रहता है

सृष्टि के …