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पं. दिव्य नारायण शास्त्री जी 

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सुदामा जी के पिता का क्या नाम है sudama ji ke pitaji ka kya naam tha

सुदामा जी के माता पिता कौन थे?   प्रेम क्या है? प्रेम की परिभाषा क्या है? सुदामा जी एक निर्धन ब्रम्हण थे जिन्होंने अपना जीवन श्री कृष्णा के चरणों मे समर्पित कर दिया था उनके पिता थे शरडधार और माता का नाम सत्यबती था और उनकी पत्नी का नाम सुसीला देवी था  सुदामा जी का घर अस्मावतीपुर (पोरबन्दर) मे था, सुदामा जी के परम् मित्र श्री कृष्ण थे और इनके गुरू जी का नाम संदीपनी मुनी था  श्री कृष्ण ने और सुदामा जी बलराम ने साथ उज्जैन में शिक्षा ग्रहण किये जब भी हम आदर्श मित्रता की बात करते हैं, सुदामा और श्री कृष्ण का प्रेम स्मरण हो आता है। एक ब्राह्मण, भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र थे। वे बड़े ज्ञानी, विषयों से विरक्त, शांतचित्त तथा जितेन्द्रिय थे।  वे गृहस्थी होकर भी किसी प्रकार का संग्रह परिग्रह न करके प्रारब्ध के अनुसार जो भी मिल जाता उसी में सन्तुष्ट रहते थे।  उनके वस्त्र फटे पुराने थे। उनकी पत्नी के वस्त्र भी वैसे ही थे। उनकी पत्नी का नाम सुशीला था। नाम के अनुसार वह शीलवती भी थीं।  वह दोनों भिक्षा मांगकर लाते और उसे ही खाते लेकिन यह बहुत दिन तक नहीं चल सका। कुछ वर्षों के बाद

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे? vishnu ke putro ke nam kya hai?

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे? Bhagvan vishnu ke putro ke kya nam the?  Bhagvan vishnu or laxmi ji ब्रह्मा के काल में हुए भगवान विष्णु को पालनहार माना जाता है। विष्णु ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु की पुत्र लक्ष्मी से विवाह किया था। शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की कन्या सती से विवाह किया था। हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के 3 मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों की खाक छानने के बाद पता चलता हैं कि वे लगभग 9500 ईसापूर्व हुए थे। यहां प्रस्तुत है भगवान विष्णु का संक्षिप्त परिचय।    आनन्द: कर्दम: श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुत:।  ऋषय श्रिय: पुत्राश्च मयि श्रीर्देवी देवता।। - (ऋग्वेद 4/5/6) भगवान विष्णु का संछिप्त परिचय- नाम - विष्‍णु वर्णन - हाथ में शंख, गदा, चक्र, कमल पत्नी- लक्ष्मी पुत्र- आनंद, कर्दम, श्रीद, चिक्लीत शस्त्र- सुदर्शन चक्र वाहन- गरूड़ विष्णु पार्षद- जय, विजय विष्णु संदेशवाहक- नारद निवास- क्षीरसागर (हिन्द महासागर) ग्रंथ- विष्णु ‍पुराण, भागवत पुराण, वराह पुराण, मत्स्य पुराण, कुर्म पुराण। मंत्र - ॐ विष्णु नम:, ॐ नमो नारायण, हरि ॐ प्रमुख अवतार   Shri maha vishnu सनक, सन

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राधा नाम राधा नाम अर्थ रा आधा यस्या सःराधा राधा   रानी के विना स्याम आधे है इसलिए राधा रानी है राधा और कृष्ण अलग अलग नही है ये दोनो एक ही है, संस्कृत में राधा शब्द के अनेक अर्थ होते है। 'राध' धातु से 'राधा' शब्द बनता है। संस्कृत में जितने शब्द है वो धातु से बनते है। आराधना (उपासना) अर्थ में 'राध' धातु होती है उससे 'आ' प्रत्यय होकर दो अर्थ हो जाता है। पहला कर्म में 'आ' प्रत्यय होता है और दूसरा करण में 'आ' प्रत्यय होता है। तो दोनों में अर्थ बदल जाता है। इसलिए राधा-रानी के बारे में दो बातें विरोधी शास्त्रों-वेदों में पाई गई हैं। पहला अर्थ कर्म में 'आ' प्रत्यय होने से आराध्य (जिसकी सब आराधना करे) अर्थ होता है। अर्थात् जिसकी उपासना ब्रह्म श्री कृष्ण करें उसका नाम राधा। वेद में कहा गया राधोपनिषद "कृष्णेन आराधते इति राधा" अर्थात् श्री कृष्ण जिसकी आराधना करें उस तत्व का नाम राधा। दूसरा अर्थ करण में 'आ' प्रत्यय होने से आराधिका ( भगवान की आराधना करने वाली) अर्थ होता है। अर्थात् कृष्ण की आराधना करने