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जीवन का सत्य क्या है? Jeevan ka Satya kya hai?

मनुष्य जीवन का सत्य क्या है? Satya kya hai? 

सत्य केवल एक ही है ब्रह्म ही सत्य है और ब्रह्म से अलग कोई दूसरा सत्य नही है। और सत्य ही ब्रह्म है जैसे जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु और मृत्यु से बड़ा कोई सत्य नही होता है लेकिन प्राणी इस अटल सत्य को मानता नही है और कोशिश करता रहता है कि वह मृत्यु से बच जायेगा किन्तु वह नही बच पाता है।
इसी प्रकार आत्मा भी सत्य है और आत्मा कभी नही मरती मरता तो प्राणी का शरीर है आत्मा तो अमर है आत्मा तो परमात्मा परब्रह्म का अंश हैै


मनुष्य जीवन का सत्य क्या है

ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन विमल सहज सुख राशी |
सो माया वश भयो गोसाईं बंध्यो जीव मरकट के नाहीं ||


और जब ब्रह्म का अंश है तो वह मर कैसे सकता है उसे तो भगवान भी नही मार सकते क्यो कि अंश तो ब्रह्म का है बल्ब को प्यूज होने के बाद फेक दिया जाता है उसी प्रकार जब इस देह को आत्मा त्याग कर जाति है तो देह जला दिया जाता है।बल्ब खुद नही जलता उसे जलाता है उसके अंदर रहने बाला तार उसी प्रकार शरीर नही चलता उसे चलाता है आत्मा


और आत्मा सत्य है कभी मरती नही है और भी कभी मरता नहीं है बस केवल सत्य का रूप स्वरूप बदल जाता है मगर सत्य तो वही है सत्य कभी कभी दिखाया नही जा सकता

जिस प्रकार पवन पर दिखाई नही देती विजली है पर दिखाई नही देती उसी प्रकार जीवन का सत्य मृत्यु है पर दिखाई नही देती है। जिस प्रकार बिजली को देखने के लिए विज्ञानिको ने बल्ब का निर्माण किया उस पर मंथन किया, उसी प्रकार सत्य को देखने के लिए हमे आत्म मंथन करना होगा क्यो कि

दूध मे माखन तो हमेसा से है सत्य है पर उसे देखने के लिए दूध का मंथन करना होता है, ठीक उसी प्रकार सत्य को देखने के लिए आत्म मंथन करना होगा


सत्य से सृष्टि टिकी है, सत्य से ब्रह्माण्ड है।
सत्य का लातीत केवल, सत्य ही भगवान है।।
त्य ही वो बीज विकसित, हुआ जो संसार है।
सत्य ही धर्मो का राजा, सत्य ही मूलाधार है।।


सत्य से ही सृष्टि टिकी है सत्य से ही ब्रह्माण्ड भी है और सत्य ही केवल सत्य है और सत्य ही भगवान है सत्य ही है जिससे संसार बना है और सत्य ही है धर्मो का राजा सत्य ही है सृष्टि की रचना मे जो जड मूर आधार है।

असत्य,छल,कपट,द्वेष,राग,मोह,माया,लोभ,लालच ये सब कुछ मन की भवना है लेकिन इन सबसे उपर केवल एक ही है जो सत्य है और कुछ भी नही और सत्य ही भगवान है


सांच बराबर तप नही,झूठ बराबर पाप।

जाके ह्रदय सांच है,ताके ह्रदय आप।।


संत कहते है सत्य के बराबर तप नही और झूठ के बराबर पाप नही होता है जिसके ह्रदय मे सत्य होता है उसके ह्रदय मे परमात्मा का निवास होता है और परमात्मा ही सत्य है



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