Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2020

जीवन का सत्य क्या है? Jeevan ka Satya kya hai?

मनुष्य जीवन का सत्य क्या है? Satya kya hai?  सत्य केवल एक ही है ब्रह्म ही सत्य है और ब्रह्म से अलग कोई दूसरा सत्य नही है। और सत्य ही ब्रह्म है जैसे जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु और मृत्यु से बड़ा कोई सत्य नही होता है लेकिन प्राणी इस अटल सत्य को मानता नही है और कोशिश करता रहता है कि वह मृत्यु से बच जायेगा किन्तु वह नही बच पाता है।
इसी प्रकार आत्मा भी सत्य है और आत्मा कभी नही मरती मरता तो प्राणी का शरीर है आत्मा तो अमर है आत्मा तो परमात्मा परब्रह्म का अंश हैै
ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन विमल सहज सुख राशी |
सो माया वश भयो गोसाईं बंध्यो जीव मरकट के नाहीं ||
और जब ब्रह्म का अंश है तो वह मर कैसे सकता है उसे तो भगवान भी नही मार सकते क्यो कि अंश तो ब्रह्म का है बल्ब को प्यूज होने के बाद फेक दिया जाता है उसी प्रकार जब इस देह को आत्मा त्याग कर जाति है तो देह जला दिया जाता है।बल्ब खुद नही जलता उसे जलाता है उसके अंदर रहने बाला तार उसी प्रकार शरीर नही चलता उसे चलाता है आत्मा
और आत्मा सत्य है कभी मरती नही है और भी कभी मरता नहीं है बस केवल सत्य का रूप स्वरूप बदल जाता है मगर सत्य तो वही है सत्य कभी कभी दि…

श्री मद्भभागवत भक्ति योग क्या है? Bhagvat kya hai?

भागवत क्या है? भागवत कहा से आई है?  Bhagvat kya hai? 
भगवतःप्रोक्तं भागवतम् -जो भगवान श्री नारायण के मुख से जिसका अवतरण हुआ है वही भागवत है । भागवत मे भक्ति योग का विसतार से वर्णन किया गया है श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि है। भगवान शुकदेव द्वारा महाराज परिक्षित  को सुनाया गया भक्तिमार्ग तो मानो सोपान ही है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण-प्रेम की सुगन्धि है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्धज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग, द्वैत, अद्वैत समन्वय के साथ प्रेरणादायी विविध उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है।श्री मद् भागवत की रचना श्री वेदव्यास जी ने कि है और फिर  शुकदेव जी को दी गई शुकदेव जी द्वारा अन्य मुनियों को प्राप्त हुई। भागवत मे १२स्कन्ध ३३५अध्याय १८००० श्लोक हैं । भागवत मे भगवान के मुधुर चरित्रो का वर्णन है भगवान ने भागवत मे प्रेम को ही सर्वश्रेष्ठ बाता है । भगवान ने भक्ति योग और ज्ञान योग एवं कर्म योग  का भी मार्ग भागवत मे बताया है। भक्ति योग- यह योग भावनाप्रधान और प्रेमी प्रकृति वाले व्यक्ति के लिए उपयोगी है। वह ईश्वर से प्रेम करना चाहता है और सभी प्रक…

श्री कृष्ण ने द्रोपदी का चीर कैसे बढाया? panch pandav

श्री कृष्ण ने द्रोपदी का चीर कैसे बढाया? Shri krishna ne dropadi ka chir kaise badaya? panch pandav,
द्रोपदी का जन्म कहा हुआ-द्रोपदी पांचाल राज्य मे हुआ  राजा द्रुपद कि पुत्री थी जिसका जन्म यज्ञ के हवन कुंड से हुआ था, इसी लिए द्रोपदी का एक नाम याज्ञशेनी भी था जब द्रोपदी का स्वयंवर हुआ तो उस स्वयंवर मे अंगराज कर्ण भी आये थे और हस्तिनापुर से राजकुमार दुर्योधन भी थे भेस बदलकर भिक्षा मागने कि इक्षा से आये हुए थे पांडव जव अंगराज कर्ण को अपमानित किया गया कि वे सूत पुत्र है फिर किसी से भी वह लक्ष्य भेद नही हुआ तव अर्जुन ने उस लक्ष्य भेद किया और स्वयंवर को जीत कर द्रोपदी को लेकर चले गयेे। पांडवो कि माता के वो बचन जिनसे द्रोपदी पांचाली बनीऔर फिर जव अपनी माता के पास गये तो धर्मराज युधिष्ठिर ने माता से कहा कि हमे भिक्षा मे क्या मिला है देखा मॉ तो मॉता पूजा मे बैठी थी और मॉ ने कहा जोभी मिला है वह तुम पांचो आपस मे बांट लो फिर जब मॉता ने देखा कि अर्जुन ने स्वयंवर जीत कर द्रोपदी को लाये है तो वो मन मे ग्लानी करने लगी और कहा की मेरा बचन मत मानो लेकिन धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा कि मॉ का बचन असत्य नही हो …

गुरू क्या होता है क्या है गुरू शब्द का अर्थ? Guru kon kahlate hai,guru ji

क्या है गुरू महिमा ? ,guru ji 
शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। अर्थात दो अक्षरों से मिलकर बने 'गुरु' शब्द का अर्थ - प्रथम अक्षर 'गु का अर्थ- 'अंधकार' होता है जबकि दूसरे अक्षर 'रु' का अर्थ- 'उसको हटाने वाला' होता है।

अर्थातअंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है। गुरु वह है जो अज्ञान का निराकरण करता है अथवा गुरु वह है जो धर्म का मार्ग दिखाता है। श्री सद्गुरु आत्म-ज्योति पर पड़े हुए विधान को हटा देता है।

ओशो कहते है गुरु के बारे में कि 'गुरु का अर्थ है- ऐसी मुक्त हो गई चेतनाएं, जो ठीक बुद्ध और कृष्ण जैसी हैं, लेकिन तुम्हारी जगह खड़ी हैं, तुम्हारे पास हैं। कुछ थो़ड़ा सा ऋण उनका बाकी है- शरीर का, उसके चुकने की प्रतीक्षा है। बहुत थोड़ा समय है।...गुरु एक पैराडॉक्स है, एक विरोधाभास है : वह तुम्हारे बीच और तुमसे बहुत दूर, वह तुम जैसा और तुम जैसा बिलकुल नहीं, वह कारागृह …