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Showing posts from June, 2020

ब्राह्मण कोन है? Brahman kon hai

ब्राह्मण कोन है?brahman kon hai?
ब्राह्मण कोन है? यह भी एक विवादास्पद विषय है। इस पर प्राचीन समय से चर्चा चली आ रही है कि ब्राह्मण जन्म से है अर्थात् अपने वंश कुल गौत्र से या अपने कर्म से।  हम लोग तो यही धारणा बना कर चलते हैं कि ब्राह्मण अपने जन्म कुल गौत्र से है, लेकिन आज समाज मे जीवन की विचार धारा में व पिछले पौराणिक ग्रन्थों में भी ब्राह्मण की विशेष परिभाषा दी है।  ब्राह्मण वो है जो ज्ञानी, है वेद मंत्रो, इश्वर की आराधना भजन पूजन का ध्यान रखता है, सत्य धर्म मे सदा बना रहता है, किसी का अहित नही सोचता, क्षमाशील, नम्रता, तप आदि गुणो से सम्पन्न है वही ब्राह्मण है। 
यजुर्वेद अध्याय ३१-मंत्र ११ मे कहा है
लोकानाम तु विवृद्धयर्थ मुख बाहु रूपादाः ब्राह्मण क्षेत्रियं वैश्यं शूद्रं च न्यवर्तयत।  अर्थात-संसार की उत्पत्ति के लिए ईश्वर के मुख, भुजा, पेट, तथा पैर से चार वर्ण पैदा हुये। सृष्टिकर्ता ईश्वर के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, पेट से वैश्य, और पैरो से शुद्र, एेसे चार वर्ण पैदा ।  चूंकि मुख अति पवित्र होता है इसी लिए ब्राह्मण को सब वर्णो मे श्रेष्ठ माना गया है।  महाभारत मे धर्मराज युधिष्ठिर न…

पांडवो का अज्ञात वास कैसे और कहा पूरा हुआ? Pandavo ka agyatavaas kaise pura hua pandavas

पांडवो का अज्ञात वास कैसे और कहा पूरा हुआ? pandavasद्युत क्रीडा
कौरवो और पांडवों के बिच द्युत क्रीडा मे कौरवो ने पांडवो को छल से हराया और उन्हें तेहरा वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञात वास पूरा करना था। 
अज्ञात वास कि सर्त थी कि अगर अज्ञात वास के बीच पकडे गये तो दोवारा तेहरा वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञात वास पुरा करना होगा वनवास के वीच भगवान श्री कृष्ण पांडवो से मिलने आया करते थे और श्री कृष्ण का तो अर्जुन और द्रोपदी से विशेष संबंध था अर्जुन श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा के पति थे और द्रोपदी श्री कृष्ण की शखी थी। और श्री कृष्ण द्रोपदी के सखा भगवान अपने भक्तो का अज्ञात वास मे भी ख्याल रखते है। 
तेहरा वर्ष का वनवास पूरा होने के बाद जब एक वर्ष का अज्ञात वास बचा तब पांडवो ने अज्ञात वास के लिए विराट नगर चुना और वहा विराट राज कि सेवा मे एक वर्ष तक रहे  उस एक वर्ष मे बीच कौरवो ने हर राज्य मे पांडवो को खोजा पर पांडव कही भी नहीं मिले तब अंत में विराट रीज बचा था वाहा का सेना पति कीचक कौरव ज्येष्ठ दुर्योधन का मित्र था पहले दुर्योधन ने अपने मित्र से कहा की मेरी सहायता करो और पांडवो को खोज कर मेरे पास ल…

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे? vishnu ke putro ke nam kya hai?

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे?Bhagvan vishnu ke putro ke kya nam the? 
ब्रह्मा के काल में हुए भगवान विष्णु को पालनहार माना जाता है। विष्णु ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु की पुत्र लक्ष्मी से विवाह किया था। शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की कन्या सती से विवाह किया था। हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के 3 मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों की खाक छानने के बाद पता चलता हैं कि वे लगभग 9500 ईसापूर्व हुए थे। यहां प्रस्तुत है भगवान विष्णु का संक्षिप्त परिचय। आनन्द: कर्दम: श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुत:। ऋषय श्रिय: पुत्राश्च मयि श्रीर्देवी देवता।।- (ऋग्वेद 4/5/6)
भगवान विष्णु का संछिप्त परिचय-
नाम - विष्‍णु वर्णन - हाथ में शंख, गदा, चक्र, कमल पत्नी- लक्ष्मी पुत्र- आनंद, कर्दम, श्रीद, चिक्लीत शस्त्र- सुदर्शन चक्र वाहन- गरूड़ विष्णु पार्षद- जय, विजय विष्णु संदेशवाहक- नारद निवास- क्षीरसागर (हिन्द महासागर) ग्रंथ- विष्णु ‍पुराण, भागवत पुराण, वराह पुराण, मत्स्य पुराण, कुर्म पुराण। मंत्र - ॐ विष्णु नम:, ॐ नमो नारायण, हरि ॐ
प्रमुख अवतार
सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार, हंसावतार, हयग्रीव, नील वराह, आदि वराह, श्व…

गरुड़ और हनुमान जी का युद्ध कैसे हुआ?

गरुड़ और हनुमान जी का युद्ध कैसे हुआ?Kaise hua rarun or hanuman ka yudha

भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है। विष्णु ने ही राम के रूप में अवतार लिया और विष्णु ने ही श्रीकृष्ण के रूप में। श्रीकृष्ण की 8 पत्नियां थीं- रुक्मणि, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। इसमें से सत्यभामा को अपनी सुंदरता और महारानी होने का घमंड हो चला था तो दूसरी ओर सुदर्शन चक्र खुद को सबसे शक्तिशाली समझता था और विष्णु वाहन गरूड़ को भी अपने सबसे तेज उड़ान भरने का घमंड था।

एक दिन श्रीकृष्ण अपनी द्वारिका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे और उनके निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी उनकी सेवा में विराजमान थे। बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में पूछा- हे प्रभु, आपने त्रेतायुग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं?
भगवान सत्यभामा की बातों का जवाब देते उससे पहले ही गरूड़ ने कहा- भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है। तभी सुदर्शन से भी रहा नहीं गया और वह भी बोल उठा कि भग…

गौ माता की महिमा gau mata ki mahima

गौ माता की महिमा क्या?  श्रीकृष्ण  की प्रिय गौ माता
गौमाता की महिमा अपरंपार है। मनुष्य अगर जीवन में गौमाता को स्थान देने का संकल्प कर ले तो वह संकट से बच सकता है। मनुष्य को चाहिए कि वह गाय को मंदिरों और घरों में स्थान दे, क्योंकि गौमाता मोक्ष दिलाती है। पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि गाय की पूंछ छूने मात्र से मुक्ति का मार्ग खुल जाता है।  गाय की महिमा को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। मनुष्य अगर गौमाता को महत्व देना सीख ले तो गौमाता उनके दुख दूर कर देती है। गाय हमारे जीवन से जु़ड़ी है। उसके दूध से लेकर मूत्र तक का उपयोग किया जा रहा है। गौमूत्र से बनने वाली दवाएं बीमारियों को दूर करने के लिए रामबाण मानी जाती हैं। गोपाष्टमीगोपाष्टमी के दिन गाय का पूजन करके उनका संरक्षण करने से मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जिस घर में गौपालन किया जाता है उस घर के लोग संस्कारी और सुखी होते हैं। इसके अलावा जीवन-मरण से मोक्ष भी गौमाता ही दिलाती है। मरने से पहले गाय की पूंछ छूते हैं ताकि जीवन में किए गए पापों से मुक्ति मिले। लोग पूजा-पाठ करके धन पाने की इच्छा रखते हैं लेकिन भाग्य बदलने वाली तो ग…