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Showing posts from May, 2020

शराब और सोम रस क्या है? Sharab or som ras? sarab ke name शराब अर्थ

क्या है सोम रस? क्यो पीते थे देवताsarab ke name
शराब अर्थ देवता शराब नही पीते थे , सोमरस सोम के पौधे से प्राप्त होता था हिमाचल की दुर्गम् पहाडियों मे , आज सोम का पौधा लगभग विलुप्त है , 
शराब पीने को सुरापान कहा जाता था , सुरापान असुर करते थे , ऋग्वेद में सुरापान को घृणा के तौर पर देखा गया है ,
टीवीसीरियल्स ने भगवान Bhagvan इंद्र को अप्सराओं से घिरा दिखाया जाता है और वो सब सोमरस पीते रहते हैं , जिसे सामान्य जनता शराब समझती है ,
सोमरस , सोम नाम की जड़ीबूटी थी जिसमे दूध और दही मिलाकर ग्रहण किया जाता था , इससे व्यक्ति बलशाली और बुद्धिमान बनता था ,
जब यज्ञ होते थे तो सबसे पहले अग्नि को आहुति सोमरस से दी जाती थी ,
ऋग्वेद में सोमरस पान के लिए अग्नि और इंद्र का सैकड़ो बार आह्वान किया गया है ,
आप जिस इंद्र को सोचकर अपने मन मे टीवी सीरियल की छवि बनाते हैं वास्तविक रूप से वैसा कुछ नही था ,
जब वेदों की रचना की गयी तो अग्नि देवता , इंद्र देवता , रुद्र देवता आदि इन्ही सब का महत्व लिखा गया है ,
मन मे वहम मत पालिये , 
कहीं पढ़ रहा था , किसी ने पोस्ट किया था कि देवता भी सोमरस पीते थे तो हम भी पियेंगे तो अचानक मन मे …

राधा नाम राधा नाम अर्थ radha नाम का अर्थ राधा हस्बैंड नाम इन हिंदी

राधा नाम राधा नाम अर्थरा आधा यस्या सःराधा

राधा रानी के विना स्याम आधे है इसलिए राधा रानी है राधा और कृष्ण अलग अलग नही है ये दोनो एक ही है,
संस्कृत में राधा शब्द के अनेक अर्थ होते है। 'राध' धातु से 'राधा' शब्द बनता है। संस्कृत में जितने शब्द है वो धातु से बनते है। आराधना (उपासना) अर्थ में 'राध' धातु होती है उससे 'आ' प्रत्यय होकर दो अर्थ हो जाता है। पहला कर्म में 'आ' प्रत्यय होता है और दूसरा करण में 'आ' प्रत्यय होता है। तो दोनों में अर्थ बदल जाता है। इसलिए राधा-रानी के बारे में दो बातें विरोधी शास्त्रों-वेदों में पाई गई हैं।

पहला अर्थ कर्म में 'आ' प्रत्यय होने से आराध्य (जिसकी सब आराधना करे) अर्थ होता है। अर्थात् जिसकी उपासना ब्रह्म श्री कृष्ण करें उसका नाम राधा। वेद में कहा गया राधोपनिषद "कृष्णेन आराधते इति राधा" अर्थात् श्री कृष्ण जिसकी आराधना करें उस तत्व का नाम राधा।

दूसरा अर्थ करण में 'आ' प्रत्यय होने से आराधिका (भगवान की आराधना करने वाली) अर्थ होता है। अर्थात् कृष्ण की आराधना करने वाली वो राधा।

राधा भजति तं कृष्…

vyas kaisa hai? vyas kaisa hota hai ? व्यास सम्मान क्या है ?

vyas kaisa haivyas kaisa hota haiव्यास सम्मान क्या हैकथा-व्यास के लक्षण >
*विरक्तो वैष्णवो विप्रो, वेदशास्त्र विशुद्धिकृत्।*
*दृष्टान्तकुशलो धीरो, वक्ता कार्योSतिनिःस्पृहः॥*

*अनेकधर्मविभ्रान्ताः, स्त्रैणाः पाखण्डवादिनः।*
*शुकशास्त्रकथोच्चारे, त्याज्यास्ते यदि पण्डिताः॥*

_(स्वस्ति *श्रीपद्मपुराणे* उत्तरखण्डे श्रीमद्भागवत माहात्म्ये *श्रवणविधिकथनं* नाम षष्ठोSध्यायः॥)_

प्रथम लक्षण - वक्ता *'विरक्त'* हो। (संसार से अथवा मन से)

द्वितीय लक्षण - *वैष्णव* हो। (वाह्य दृष्टि से अथवा आतंरिक दृष्टि से)

तृतीय लक्षण - *विप्र* हो। (यह भी चर्चनीय है।)

चतुर्थ लक्षण - *वेद-शास्त्रों का विशुद्ध ज्ञाता* हो।

पञ्चम लक्षण - *दृष्टांत (शास्त्रीय) देने में कुशल* हो (अर्थात् ग्रन्थ की कथा में छिपे रहस्य को समझाने हेतु दिए गए छोटे दृष्टांत जिनसे प्रसंगान्तर प्रतीत न हो उनको सरल, सहज, सुगम बनाकर ऐसे समझाए जिससे खेत में कार्यरत कृषक अथवा पढ़े-लिखे लोगों को भी समझ में आ जाए।)

षष्ठं लक्षण - *धीर* हो अर्थात् धैर्यवान हो।

सप्तम लक्षण - *अति निःस्पृही* हो। (अर्थात् लोभी-लालची न हो, कथा की दक्षिणा तय न करे, मन…

मॉ शब्द का अर्थ क्या है? मॉ की प्रेम क्या है? Ma kya hai?

मॉ का प्रेम, मॉ क्या होती है?मॉ पृथ्वी पर भगवान का दूसरी रूप होती मॉ शब्द की व्याख्या तो बडे बडे ज्ञानी भी नहीं कर सके अगर कौसल्या मॉ नहोती तो हमे श्री राम कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान न मिलते देवकी मॉ नहोती तो हमे श्री कृष्ण जैसे नटखट बाल गोपाल न मिलते और हमे गीता का जैसा महा ग्रंथ न मिलता माता मत्स्यगंधा (सत्यवती) न होती तो वेदव्यास जैसे ज्ञानी न होते और १८पुराण न होते ४वेद न होते मॉ न होती तो सुखदेव जैसे परमहंस न होते तो परीक्षित का मोक्ष न होता अगर मॉ न होती तो सृष्टि न होती। 
Prem kya hai

और आज उसी मॉ को दर दर भटकाते उसी मॉ को जीसने अपने बच्चों का पेट भरने के लिए खुद भोजन नही किया शास्त्र कहता है जो मॉ का सम्मान नही करते उसे इस पृथ्वी पर रहने का अधिकार नही है क्यो की पृथ्वी भी मॉ ही है।
जिस प्रकार बच्चा अपनी को गर्भ मे मॉ को लात मारत है तो मा सहन कर लेती है उसी प्रकार हम पृथ्वी पर प्रहार करते हैं
पृथ्वी पर मल मूत्र त्याग करते हैं लेकिन मॉ कभी कुछ नही कहती हम पृथ्वी मॉ पर हल चला कर पृथ्वी का सीना छल्ली करते हैं पर पृथ्वी मॉ हमे अनाज देती हैं क्यो की, 


कुपुत्रो जायेता क्वचदपी कुमाता न …