Skip to main content

सरस्वती श्लोक का अर्थ

सरस्वती श्लोक 
शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे । 
सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात् ॥
भावार्थ 
शरत्काल में उत्पन्न कमल के समान मुखवाली और सब मनोरथों को देनेवाली शारदा सब सम्पत्तियों के साथ मेरे मुख में सदा निवास करें ।

सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् । 
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ॥
भावार्थ 
वाणी की अधिष्ठात्री उन देवी सरस्वती को प्रणाम करता हूँ, जिनकी कृपा से मनुष्य देवता बन जाता है ।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं । वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् । हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे ताम् परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥
भावार्थ 
जिनका रूप श्वेत है, जो ब्रह्मविचार की परम तत्व हैं, जो सब संसार में फैले रही हैं, जो हाथों में वीणा और पुस्तक धारण किये रहती हैं, अभय देती हैं, मूर्खतारूपी अन्धकार को दूर करती हैं, हाथ में स्फटिकमणि की माला लिए रहती हैं, कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और बुद्धि देनेवाली हैं, उन आद्या परमेश्वरी भगवती सरस्वती की मैं वन्दना करता हूँ ।

पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती । 
प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ॥
भावार्थ 
बुद्धिरूपी सोने के लिए कसौटी के समान सरस्वती जी, जो केवल वचन से ही विद्धान् और मूर्खों की परीक्षा कर देती है, हमलोगों का पालन करें ।

Comments

Popular posts from this blog

सुदामा जी के पिता का क्या नाम है sudama ji ke pitaji ka kya naam tha

सुदामा जी के माता पिता कौन थे?   प्रेम क्या है? प्रेम की परिभाषा क्या है? सुदामा जी एक निर्धन ब्रम्हण थे जिन्होंने अपना जीवन श्री कृष्णा के चरणों मे समर्पित कर दिया था उनके पिता थे शरडधार और माता का नाम सत्यबती था और उनकी पत्नी का नाम सुसीला देवी था  सुदामा जी का घर अस्मावतीपुर (पोरबन्दर) मे था, सुदामा जी के परम् मित्र श्री कृष्ण थे और इनके गुरू जी का नाम संदीपनी मुनी था  श्री कृष्ण ने और सुदामा जी बलराम ने साथ उज्जैन में शिक्षा ग्रहण किये जब भी हम आदर्श मित्रता की बात करते हैं, सुदामा और श्री कृष्ण का प्रेम स्मरण हो आता है। एक ब्राह्मण, भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र थे। वे बड़े ज्ञानी, विषयों से विरक्त, शांतचित्त तथा जितेन्द्रिय थे।  वे गृहस्थी होकर भी किसी प्रकार का संग्रह परिग्रह न करके प्रारब्ध के अनुसार जो भी मिल जाता उसी में सन्तुष्ट रहते थे।  उनके वस्त्र फटे पुराने थे। उनकी पत्नी के वस्त्र भी वैसे ही थे। उनकी पत्नी का नाम सुशीला था। नाम के अनुसार वह शीलवती भी थीं।  वह दोनों भिक्षा मांगकर लाते और उसे ही खाते लेकिन यह बहुत दिन तक नहीं चल सका। कुछ वर्षों के बाद

जीवन का सत्य क्या है? Jeevan ka Satya kya hai?

मनुष्य जीवन का सत्य क्या है? Satya kya hai?  सत्य केवल एक ही है ब्रह्म ही सत्य है और ब्रह्म से अलग कोई दूसरा सत्य नही है। और सत्य ही ब्रह्म है जैसे जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु और मृत्यु से बड़ा कोई सत्य नही होता है लेकिन प्राणी इस अटल सत्य को मानता नही है और कोशिश करता रहता है कि वह मृत्यु से बच जायेगा किन्तु वह नही बच पाता है। इसी प्रकार आत्मा भी सत्य है और आत्मा कभी नही मरती मरता तो प्राणी का शरीर है आत्मा तो अमर है आत्मा तो परमात्मा परब्रह्म का अंश हैै मनुष्य जीवन का सत्य क्या है ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन विमल सहज सुख राशी | सो माया वश भयो गोसाईं बंध्यो जीव मरकट के नाहीं || और जब ब्रह्म का अंश है तो वह मर कैसे सकता है उसे तो भगवान भी नही मार सकते क्यो कि अंश तो ब्रह्म का है  बल्ब को प्यूज होने के बाद फेक दिया जाता है उसी प्रकार जब इस देह को आत्मा त्याग कर जाति है तो देह जला दिया जाता है। बल्ब खुद नही जलता उसे जलाता है उसके अंदर रहने बाला तार उसी प्रकार शरीर नही चलता उसे चलाता है आत्मा और आत्मा सत्य है कभी मरती नही है और भी कभी मरता नहीं है बस केवल सत्य का रूप स्वरूप बदल

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे? vishnu ke putro ke nam kya hai?

भगवान विष्णु के पुत्रो के नाम क्या थे? Bhagvan vishnu ke putro ke kya nam the?  Bhagvan vishnu or laxmi ji ब्रह्मा के काल में हुए भगवान विष्णु को पालनहार माना जाता है। विष्णु ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु की पुत्र लक्ष्मी से विवाह किया था। शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की कन्या सती से विवाह किया था। हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के 3 मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों की खाक छानने के बाद पता चलता हैं कि वे लगभग 9500 ईसापूर्व हुए थे। यहां प्रस्तुत है भगवान विष्णु का संक्षिप्त परिचय।    आनन्द: कर्दम: श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुत:।  ऋषय श्रिय: पुत्राश्च मयि श्रीर्देवी देवता।। - (ऋग्वेद 4/5/6) भगवान विष्णु का संछिप्त परिचय- नाम - विष्‍णु वर्णन - हाथ में शंख, गदा, चक्र, कमल पत्नी- लक्ष्मी पुत्र- आनंद, कर्दम, श्रीद, चिक्लीत शस्त्र- सुदर्शन चक्र वाहन- गरूड़ विष्णु पार्षद- जय, विजय विष्णु संदेशवाहक- नारद निवास- क्षीरसागर (हिन्द महासागर) ग्रंथ- विष्णु ‍पुराण, भागवत पुराण, वराह पुराण, मत्स्य पुराण, कुर्म पुराण। मंत्र - ॐ विष्णु नम:, ॐ नमो नारायण, हरि ॐ प्रमुख अवतार   Shri maha vishnu सनक, सन