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Showing posts from January, 2020

सरस्वती श्लोक का अर्थ

सरस्वती श्लोक 
शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे ।  सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात् ॥ भावार्थ शरत्काल में उत्पन्न कमल के समान मुखवाली और सब मनोरथों को देनेवाली शारदा सब सम्पत्तियों के साथ मेरे मुख में सदा निवास करें ।
सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् ।  देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ॥ भावार्थ वाणी की अधिष्ठात्री उन देवी सरस्वती को प्रणाम करता हूँ, जिनकी कृपा से मनुष्य देवता बन जाता है ।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं । वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् । हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे ताम् परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥ भावार्थ जिनका रूप श्वेत है, जो ब्रह्मविचार की परम तत्व हैं, जो सब संसार में फैले रही हैं, जो हाथों में वीणा और पुस्तक धारण किये रहती हैं, अभय देती हैं, मूर्खतारूपी अन्धकार को दूर करती हैं, हाथ में स्फटिकमणि की माला लिए रहती हैं, कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और बुद्धि देनेवाली हैं, उन आद्या परमेश्वरी भगवती सरस्वती की मैं वन्दना करता हूँ ।
पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती ।  प्राज्ञेतरपरिच्छेद…

सत्य क्या है? satya kya hai?

सत्य क्या है? ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्यम्


ब्रह्म ही सत्य है बकी सारा जगत मिथ्या है, उस संसार में परम पिता परमात्मा ही सत्य है वाकी सारा जगत मिथ्या है एक मात्र शाश्वत सत्य मृत्यू ही है इस संसार में जोभी कुछ है वह सब कुछ झूठ है और यह संसार परमात्मा का रंग मंच है और हम उनके खिलौने है जिस प्रकार बच्चे थिलौनो से खेलते है
 और फिर जब मन भर जाता है तो उन्हे तोड देते हैं उसी प्रकार ब्रह्म भी खेलते है और मन भर जाता है तो संसार का प्रलय कर देते हैं
भगवान का यह संसार कृणा स्थल है जहा प्रभू खेलते है और मनुष्य जब कोई गलती करता है और पाप करता है तो भगवान हसते है कि मेने तुम्हे संसार में तुम्हें धर्म कर्म करने के लिए भेजा था और तुम ये सब पाप कर रहे हो हमे पाप का मार्ग छोड के पुण्य का मार्ग अपनाना चाहिए परमात्मा ने हमे 84लाख योनियो मे सबसे श्रेष्ठ मनुष्य का जन्म दिया
और हम इस सरीर को व्यर्थ गवा रहे हैं हमे जब और अच्छी चीज फ्री मे मिलती है तो हमे उसका उपयोग बहुत अच्छे से करना चाहिए और हमे तो बहुत ही कीमती शरीर मिला है
 जो देवताओ को भी दुर्लभ है
बडें भाग्य मानुष तनपावा
 सुरदुर्लभ सब ग्रंथन गाबा
वह शरीर मिला…

ब्रह्म क्या है? कोन है? brahm kya hai?

ब्रह्म क्या है? कोन है?
ब्रह्म एक सून्य के समान है जो अपने आप मे पूर्ण है जिस प्रकार किसी अंक के पीछे सून्य लग जाने से उस अंक कि किमत बढ जाजी है उसी प्रकार ब्रह्म है | ब्रम्ह कि जरूरत सब को है परंतू ब्रह्म को किसी जरूरत नही है ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार सून्य कि जरूरत अंको को है
 mahavishnu  सून्य को किसी कि जरूरत नही है | परब्रह्म एक सून्य के समान है ब्रह्म हर जगह है इशा वाशं जगत सर्वं इश्वर का वाश सारे जगत मे है हर प्राणी मे इश्वर है वही इश्वर जो जगत मे हमे रहने कि भोजन कि व्यवस्था देते हैं
srashthi ki utpatti सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई? परमात्मा का उपकार हमे पुन्य करके चुकान चाहिए लेकिन हम पुण्य करने कि जगह पाप कि पाप कर रहे हैं  माया माया सब भजे माधव भजे ना कोई|
 जो एक बार माधव भजे माया चेली होये || तो पैसा पैसा तो सब बोलते हैं पर भगबान का नाम कोई नहीं लेता है लेकिन एक बार सच्चे मन से भगबान का नाम लेलिया ना तो माया भी पीछे पीछे घूमेगी |  प्रेम क्या है?|Prem kya had? हमे दिन भर में दस मिनट तो भगवान का नाम लेना चाहिए इस काम से भगबान तो प्रशन्न होते ही है और मन भी शांत रहता है

सृष्टि के …