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Showing posts from December, 2019

आत्मा क्या है|aatma kya hai?

आत्मा क्या है? नैनं छिन्दन्ती सहस्त्राणी नैनं दहती पावकाः| न चेनम् क्ले दयं तापो न शोशयती मारुताः||
आत्मा को न कोई तलबार कि धार से काट सकता है,  ना ही सूर्य के ताप से सखाया जा सकता है, ना ही अग्नी मे जलाया जा सकता है,  आत्मा अमर होती है मरता तो लेवल और केवल शरीर है,जिस प्रकार मनुष्य अपने पुराने कपडे को उतार के नये कपडे धारण करता है बैसे ही आत्मा भी पुराने शरीर को छोड के नया शरीर धारण करती है,  आत्मा कभी नहीं मरती आत्मा अमर है||

आत्मा कोन है  आत्मा परमात्मा का अंश है जो अमर है आत्मा परमात्मा एक येव आत्मा का कोई रूप नही है मनुष्य अपने आत्म वोध को भूल गया है जिसे आत्म वोध हो जाये वह परमात्मा के सामान दिव्य हो जाता है आत्मा एक ज्योति स्वरुप है जिसे कोई देख नही सकता, आत्मा भगवन का भजन करना चाहती है परन्तु मन आत्मा को भगवन का भजन नही करने देती भगवन ने मनुष्य को संसार में भेजा है ताकि मनुष्य भगवन का भजन करके मुक्ति को पासके और भगवन के पास जाके अपना कल्याण कर सके जिस प्रकार पुत्र अपने पिता का अंश होता है उसी प्रकार आत्मा परमात्मा का अंश है एक  एक दिना वन में वस के वनराज की नारी ने नाहर जायो काहू…

भक्ति क्या है | bhakti kya hai?

भक्ती क्या है?  कैसे करे भक्ती? 
भक्ति एक सुगम मार्ग है परमेश्वर तक पहुच ने का मनुष्य अगर भक्ति मार्ग को चुन ले तो उसका जीवन सफल हो जाता है और फिर परमेश्वर से मिलने के बाद मनुष्य को किसी वस्तू की कामना नही होती है   में भक्ति कालअपना एक अहम और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को पूर्व मध्यकाल भी कहा जाता है। जिसकी समयावधि संवत् 1325ई से संवत् 1650ई तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य(साहित्यिक दो प्रकार के हैं- धार्मिक साहित्य और लौकिक साहित्य) का श्रेष्ठ युग है। जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्यामसुन्दर दास ने स्वर्णयुग,आचार्य राम चंद्र शुक्ल ने भक्ति काल एवं हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लोक जागरण कहा। सम्पूर्ण साहित्य के श्रेष्ठ कवि और उत्तम रचनाएं इसी युग में प्राप्त होती हैं। दक्षिण में आलवार बंधु नाम से कई प्रख्यात भक्त हुए हैं। इनमें से कई तथाकथित नीची जातियों के भी थे। वे बहुत पढे-लिखे नहीं थे, परंतु अनुभवी थे। आलवारों के पश्चात दक्षिण में आचार्यों की एक परंपरा चली जिसमें रामानुजाचार्य  प्रमुख थे। रामानुजाचार्य की परंपरा में रामानंद हुए। उनका व्यक्तित्व असा…