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Showing posts from November, 2019

नर्क कितने प्रकार के होते हैं?Nark kitne prakar ke hote hai

नर्क कितने प्रकार के होते हैं?
धार्मिक मान्यता अनुसार नरक वह स्थान है जहां पापियों की आत्मा दंड भोगने के लिए भेजी जाती है। दंड के बाद कर्मानुसार उनका दूसरी योनियों में जन्म होता है। कहते हैं कि स्वर्ग धरती के ऊपर है तो नरक धरती के नीचे यानी पाताल भूमि में हैं। इसे अधोलोक भी कहते हैं। अधोलोक यानी नीचे का लोक है। ऊर्ध्व लोक का अर्थ ऊपर का लोक अर्थात् स्वर्ग। मध्य लोक में हमारा ब्रह्मांड है। सामान्यत: 1.उर्ध्व गति, 2.स्थिर गति और 3.अधोगति होती है जोकि अगति और गति के अंतर्गत आती हैं।
कुछ लोग स्वर्ग या नरक की बातों को कल्पना मानते हैं तो कुछ लोग सत्य। जो सत्य मानते हैं उनके अनुसार मति से ही गति तय होती है कि आप अधोलोक में गिरेंगे या की ऊर्ध्व लोक में। हिन्दू धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि गति दो प्रकार की होती है 1.अगति और 2. गति। अगति के चार प्रकार है- 1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति।... और गति में जीव को चार में से किसी एक लोक में जाना पड़ता है। गति के अंतर्गत चार लोक दिए गए हैं: 1.ब्रह्मलोक, 2.देवलोक, 3.पितृलोक और 4.नर्कलोक। जीव अपने कर्मों के अनुसार उक्त लोकों में जाता ह…

सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई?srasti ki utppi kaise hui?

सृष्टि कि उत्पत्ति कैसे हुई?  सकल जग हरि कौ रूप निहार।हरि बिनु बिस्व कतहुँ कोउ नाहीं, मिथ्या भ्संसार।।अलख-निरंजन, सब जग ब्यापक, सब जग कौ आधार।नहिं आधार, नाहिं कोउ हरि महँ, केवल हरि-बिस्तार।।  अखिल ब्रह्माण्ड नायक कि सृष्टि कि सुन्दरता इतनी है कि कोई और करीगर एसी करिगरी नही कर सकता  एक प्रकार से कहा जाये तो मनुष्यो और जीव-जन्तूओ के लिए पांच सितारा बाला होटल है ये संसार परंतू मनुष्य इसे अपने तरीके से बदल रहा है  भगवान कहते हैं -मेने मानुष जनम तुमको हीरा दिया,तू व्यर्थ गवाए तो मे क्या करू|
वेद-वेदान्तो मे सब बता ही दिया,
तेरी समझ में ना आये तो मे क्या करू ||
अन्न फल दूध धी भी तुमको दिया,
मेवा मिष्टान भी मेने पैदा दिया ||
हत्यारा हो जीभ के स्वाद में |
तू अगर मान्स खाए तो मे क्या करू ||
यह अनंत ब्रह्माण्ड अलख-निरंजन परब्रह्म परमात्मा का खेल है। जैसे बालक मिट्टी के घरोंदे बनाता है, कुछ समय उसमें रहने का अभिनय करता है और अंत मे उसे ध्वस्त कर चल देता है। उसी प्रकार परब्रह्म भी इस अनन्त सृष्टि की रचना करता है, उसका पालन करता है और अंत में उसका संहारकर अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है। यही उसकी क्रीडा है,…

परमात्मा कोन है?parmatma kon hai?

परमात्मा कोन है? इस धरती पर जन्म लेते ही ,हम किसी ना किसी धर्म के अनुयायी हो जाते है , वो जन्मजात संस्कार की घुट्टी हमें हमारे परिवार द्वारा पीला दी जाती है, की हमें किसकी पूजा करनी है किस भगवान ,पीर,पैगम्बर,मसीहा,देवदूत,देवता को मानना और पूजना है. कुछ बड़े होने पे विवेक से या स्वार्थ से लोग अपना धर्म भी परिवर्तित कर लेते है और फिर दूसरे भगवानो,मूर्तियों,पैगम्बरो,या देवदूतों को पूजने लग जाते है. परन्तु क्या वो जिसे पूज रहे है क्या उसका "अस्तित्व" है इस सृष्टि में ???

1.हिन्दू तरह-तरह के देवी देवता और अलग अलग भगवान् को पूजते है

2.मुस्लिम अल्लाह को तो मानते है साथ ही साथ पीर,पैगम्बर ,दरगाह ना जाने और क्या- क्या?

3.ईशाई युसु,मरियम,यहोवा और भी...... इसी प्रकार जैन ,बौद्ध, और भी धर्म के लोग ना जाने कितनो को पूजते है...

और इसी प्रकार सबके अपने अपने अस्तित्व वाले भगवान! ऐसे लोगो को या, ये कहे की सभी को पता है की हम सबको जन्म देने वाला परमेश्वर एक ही है,और वो अलग हो भी नहीं सकता

परन्तु फिर भी अज्ञानतावस या स्वार्थवस लोग एक परमात्मा को नहीं पूजते. और अगर सभी को पता भी है की परमात्मा ए…